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Wednesday, 18 July 2012

ओलंपिक कोई भूत नहीं जिससे डरा जाए


महज 18 साल की उम्र में वह दुनिया में नंबर एक तीरंदाज और भारत की ओलंपिक खेलों में पदक जीतने की प्रबल दावेदार हैं। लेकिन दीपिका कुमारी पर उम्मीदों का किसी प्रकार का दबाव नहीं है। इस युवा तीरंदाज का कहना है कि लंदन ओलंपिक कोई भूत नहीं है जिससे डरा जाए। असाधारण प्रतिभा की धनी दीपिका ने अपने बेहद शात स्वभाव के कारण ही छोटी उम्र में जबर्दस्त सफलता हासिल की है। दीपिका ने इस साल अपने प्रदेश के बड़े खिलाड़ी टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी से राची में मुलाकात की थी और विश्व कप विजेता कप्तान की जमकर तारीफ करते हुए कहा था कि वह एक महान हस्ती हैं। उन्होंने कहा कि हम दोनों एक ही राज्य से आते हैं और यह गर्व की बात है। लंदन के लिए रवाना होने से पूर्व दीपिका ने कहा कि उम्मीद है कि मैं ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का अपना लक्ष्य पूरा कर सकती हूं, जो हर खिलाड़ी की जिंदगी का सपना होता है। दबाव में भी शात बने रहने का राज पूछने पर राष्ट्रमंडल खेलों की दोहरी स्वर्ण विजेता दीपिका ने कहा कि ओलंपिक कोई भूत नहीं है, इसलिए किसी प्रकार से डरने की जरूरत नहीं है। मुझे अपने ऊपर यकीन है और पूरा आत्मविश्वास है। यही वजह है कि आज मैं यहां हूं। दीपिका का स्वभाव भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और राज्य के साथी खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी से मेल खाता है।

Wednesday, 4 July 2012

नंबर एक होने का दबाव नहीं: दीपिका


dipeeka kumari
लंदन ओलंपिक खेलों में पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही दीपिका कुमारी ने सोमवार को कहा कि उन पर दुनिया की नंबर एक तीरंदाज होने का दबाव नहीं है और वह किसी भी परिस्थिति में पदक जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 18 वर्षीय दीपिका ने कहा, 'यह मेरा पहला ओलंपिक है और इसलिए मैं आत्मविश्वास से ओतप्रोत हूं। मुझे पता है कि मैं अभी दुनिया की नंबर एक तीरंदाज हूं और मुझसे काफी अपेक्षाएं की जा रही हैं लेकिन इसका मुझ पर किसी तरह का दबाव नहीं है। नंबर एक बनने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है, लेकिन मैं इससे बहुत अधिक खुश नहीं हूं। मुझे सबसे ज्यादा खुशी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर ही मिलेगी। वैसे अभी हमारा लक्ष्य पदक हासिल करना है क्योंकि हमें पता है कि विश्व कप आदि में अच्छे प्रदर्शन से जब तीरंदाजी भारत में महत्वपूर्ण खेल बन गया है तो फिर ओलंपिक पदक इस खेल को किस ऊंचाई पर पहुंचाएगा।'