लंदन ओलंपिक का पहला दिन भारत के लिए बहुत ही खराब रहा। आज खेले गए अधिकांश खेलों में भारतीय खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा झटका बॉक्सिंग में लगा जब पदक के मजबूत दावेदार शिव थापा को पहले ही राउंड में हार कर ओलंपिक से बाहर होना पड़ा। 56 किग्रा वर्ग के मुकाबले में थापा को मैक्सिको के ऑस्कर वाल्देज फिएरो ने 14-9 से बुरी तरह रगड़ डाला। पदक जीतने के दावेदारों में एक 18 वर्षीय थापा पहले राउंड में 2-4 से पिछड़ गए थे। दूसरे राउंड में थापा ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार अंक अर्जित किए और स्कोर 6-7 तक पहुंचाया। तीसरे राउंड में थापा के पास मैक्सिकन प्रतिद्वंद्वी के मुक्कों का कोई जवाब नहीं था और फिएरो ने 14-9 से मुकाबला अपने नाम किया।
खेलों में वह ताकत है, जिससे विश्व के सभी देशो में भाईचारा का विकास हो सकता है || - mithilesh2020
Saturday, 28 July 2012
..ऐसे में भारतीय कैसे जीत पाएंगे ओलंपिक मेडल
भारतीय खिलाड़ियों से लंदन ओलंपिक में इस बार ढेरों पदक की आस है। 30वें खेलों के महाकुंभ में भारत के रिकॉर्ड 81 एथलीट भाग ले रहे हैं और उनसे देशवासी पदक की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि कई खिलाड़ी मिले खराब ड्रेस को लेकर चिंतित हैं और इस बावत उन्होंने शिकायत भी दर्ज कराई है।
दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ एथलीट लंदन में एकत्र हो रहे हैं और भारतीयों को अपनी चुनौती पेश करनी है। ऐसे में दोयम दर्जे के किट्स को लेकर खिलाड़ी परेशान हैं। एक भारतीय मुक्केबाज का कहना है कि हमें अच्छी ड्रेस नहीं मिली है। कइयों को तो ड्रेस फिट भी नहीं हो रही है। इससे अच्छा तो राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला ड्रेस होता है। हम लोग खेल के बजाए ड्रेस पर सारा ध्यान लगाने को मजबूर हैं।
दूसरी तरफ हॉकी टीम भी खराब ड्रेस को लेकर नाराज है। स्टार डैग फ्लिकर संदीप सिंह के शार्ट्स की सिलाई खुली हुई थी और उन्होंने नाराजगी दिखाते हुए उसे पहने रखा। यही हाल तीरंदाजी टीम का भी है। हालांकि ड्रेस बनाने वाली कंपनी ने खराब ड्रेस के आरोपों से इनकार किया है।
Wednesday, 25 July 2012
लक्ष्मी मित्तल थामेंगे ओलंपिक मशाल
स्टील मैन' के नाम से मशहूर भारतीय उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल उन खास शख्सियतों में शामिल हैं, जिन्हें उद्घाटन समारोह से एक दिन पूर्व ओलंपिक मशाल थामने का मौका दिया जाएगा। गुरुवार को कैमडेन से लेकर वेस्टमिंस्टर तक मशाल दौड़ होगी, जिसमें चुनिंदा लोग शामिल होंगे।
मित्तल के 36 वर्षीय पुत्र आदित्य मित्तल को भी इस मशाल दौड़ में शामिल होने का मौका मिला है। 62 वर्षीय मित्तल ने कहा, 'जब मैं किसी ओलंपियन और खुद में समानता खोजने की कोशिश करता हूं तो पाता हूं कि व्यापार की दुनिया में भी सफलता दृढ़ता और कड़ी मेहनत के सिद्धांत पर मिलती है। मशाल दौड़ ओलंपिक खेलों के लिए मनाए जाने वाले उत्सव की अभिव्यक्ति है। मेरे हिसाब से ओलंपिक खेल उस प्रयास का मूर्त रूप है जिसे हर कोई अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए करता है।'
ओलंपिक स्टेडियम के पास बने विशालकाय आर्सेलर ऑरबिट का निर्माण मित्तल ने ही करवाया है। ओलंपिक देखने के लिए लंदन पहुंच रहे लोगों के लिए यह एक आकर्षण का केंद्र है। टर्नर पुरस्कार विजेता कलाकार अनिश कपूर ने इसे डिजाइन किया है। आर्सेलर ऑरबिट लंदन में बनी सबसे ऊंची संरचना है। लंदन ओलंपिक के मुख्य प्रायोजकों में से एक मित्तल की कंपनी ने इसके निर्माण में 20 करोड़ पौंड खर्च किए। मित्तल चैंपियन ट्रस्ट भारतीय एथलीटों का समर्थन कर रही है। उसने बीते मंगलवार को भारतीय एथलीटों के लिए एक स्वागत समारोह भी आयोजित किया था
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वीजा न मिलने से बेलारूस नहीं जा सके सुशील
लंदन ओलंपिक से पहले भारतीय कुश्ती दल को झटका लगा है। ओलंपिक में भारतीय टीम के ध्वजवाहक सुशील कुमार सहित कुश्ती दल के पांचों पहलवानों को बेलारूस का मल्टीपल एंट्री वीजा (एकाधिक प्रवेश वीजा) नहीं मिला। इस कारण चार अन्य पहलवान अमित कुमार, योगेश्वर दत्त, नरसिंह यादव और गीता तय समय (19 जुलाई) के चार दिन बाद सोमवार को बेलारूस रवाना हुए, लेकिन सुशील बेलारूस नहीं जा पाए। अब ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में जब सुशील तिरंगा लिए भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे होंगे उस वक्त ये चार पहलवान उस परेड का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
भारतीय कुश्ती महासंघ के महासचिव राज सिंह ने कहा कि बेलारूस ने पहलवानों को सिंगल एंट्री वीजा दिया था। भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा ध्वजवाहक के लिए सुशील का नाम बाद में घोषित हुआ। उससे पहले वीजा की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। बाद में महासंघ ने मल्टीपल एंट्री वीजा के लिए प्रयास किया पर वह नहीं मिला। यदि वह वीजा मिल जाता तो सुशील बेलारूस जाकर कुछ दिन अभ्यास करने के बाद लंदन जा सकते थे और फिर ध्वजवाहक की भूमिका निभाने के बाद बेलारूस लौटकर प्रशिक्षण कर सकते थे। अब वह 26 जुलाई को राज सिंह और मुख्य कोच विनोद के साथ लंदन रवाना होंगे। जहां 27 जुलाई को उद्घाटन समारोह में शामिल होने के बाद बाद 28 जुलाई को सुशील बेलारूस जाएंगे।
फेडरर, अजारेंका को शीर्ष वरीयता
दुनिया के नंबर एक पुरुष टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर और महिला खिलाड़ी विक्टोरिया अजारेका को लंदन ओलंपिक में शीर्ष वरीयता दी गई है। टेनिस का ड्रॉ गुरुवार को विंबलडन में निकाला जाएगा और शानदार खिलाड़ियों से सजा टूर्नामेंट शनिवार से शुरू होगा।
सिंगल्स वर्ग में 64 प्रतिद्वंद्धी होंगे। इस बार विंबलडन चैंपियन फेडरर अपना पहला सिंगल्स ओलंपिक पदक जीतना चाहेगे। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में स्टनीसलास वावरिंका के साथ मिक्स्ड डबल्स का स्वर्ण पदक हासिल किया था। पिछले ओलंपिक में सिंगल्स का स्वर्ण पदक जीतने वाले स्पेनिश खिलाड़ी राफेल नडाल घुटने में चोट के कारण नाम वापस ले चुके है। डबल्स स्पद्र्धाओं में 32-32 टीमें होंगी। मिक्स्ड डबल्स की 16 टीमों का ड्रॉ 11 जून की रैकिंग पर आधारित होगा।
कालाबाजारियों ने 300 गुना महंगी की टिकट
ओलंपिक का उद्घाटन समारोह शुरू होने में केवल दो दिन बचे हैं, लेकिन ब्रिटेन में रह रहे 16 लाख प्रवासी भारतीय जानकारी के अभाव, टिकटों की ऊंची दरों और इनकी कालाबाजारी के कारण उद्घाटन समारोह से खुद को दूर रखने के लिए मजबूर हैं।
उद्घाटन समारोह के टिकट ब्लैक मार्केट में काफी ऊंची कीमत पर बेचे जा रहे है। बहुत ही कम लोगों को पता है कि टिकट आधिकारिक वेबासाइट पर महज 20 पौंड [1720 रुपये] में उपलब्ध हैं, लेकिन कालाबाजारी के कारण इसे 300 गुना महंगाकर 6,000 पौंड [5,16,000 रुपये] तक में बेचा जा रहा है। टिकटों की कालाबाजारी को आपराधिक कृत्य माना गया है और इसके लिए ओलंपिक कानून 2006 के मुताबिक 20,000 पौंड तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है।
मेट्रोपोलिटन पुलिस ने ऑपरेशन पोडियम के तहत टिकट ब्लैक करने पर अब तक तीन दर्जन से ज्यादा वेबसाइट के खिलाफ कार्रवाई की और करीब एक हजार लोगों को गिरफ्तार किया है। खेलों की सुरक्षा से जुड़े मोहसिन अली रजा ने कहा, 'कालाबाजारी करने वालों में कुछ तो बहुत कुटिल है और उनकी भीतर तक सांठगांठ है।' गुडमेज में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर सिबासिस नायक ने कहा, 'मैंने जब पिछले साल यह सुना कि करीब 10 लाख लोगों को पहले दौर में ही टिकट देने से इन्कार कर दिया गया तो उसके बाद मुझे लगा कि टिकट की उम्मीद करना बेमानी है।'
जीतने के लिए तैयार हैं भारतीय तीरंदाज
तीन बार ओलंपियन रहे 40 वर्षीय लिम्बा राम पहली बार 6 भारतीय तीरंदाजों के कोच बनकर लंदन गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके तीरंदाज तो कामयाबी के भूखे हैं, उनको ओलंपिक के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है जिसमें उन्हें अपना पहला पदक जीतना है। लिम्बा बोले कि उनकी टीम का पूरा ध्यान अपनी जीत पर है और इससे पहले उन्होंने अपने तीरंदाजों को जीतने के लिए इतना उत्सुक नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि हम स्वर्ण पदक जीतेंगे ही जीतेंगे पर यह जरूर होगा कि जब हम वापस भारत लौटेंगे तो हमारा सिर गर्व से ऊंचा होगा। अपनी तीरंदाजों की तैयारी के बारे में लिम्बा ने कहा कि लंदन के मौसम की वजह से उनके तीरंदाज थोड़ा बीमार हो गये थे पर अब वह बिल्कुल ठीक हैं और शुक्रवार को होने वाले रैकिंग राउंड के लिए बिल्कुल तैयार हैं। रैकिंग राउंड शुक्रवार को लॉर्ड के नर्सरी ग्राउंड में होगा और मेडल राउंड शनिवार को मुख्य स्टेडियम में होगा। लिम्बा 1992 के बार्सेलोना गेम्स में एक प्वॉइंट से कांस्य पदक हार गये थे। इस बारे में उन्होंने कहा कि अभी उनको अपने आपको साबित करना बाकी है और इस बार वह अपने आपको अपने प्रतिभागियों द्वारा साबित करेंगे।
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